कोलकाता और हावड़ा में वायु की गुणवत्ता के गंभीर रूप से गिरने के कारण कलकत्ता उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की गई है। इस याचिका में पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने वर्तमान स्थिति को ‘सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल’ के रूप में चिन्हित करने की मांग की है। याचिका में बताया गया है कि इन शहरों में प्रदूषण का स्तर अनुमेय सीमा से कहीं अधिक बढ़ गया है, जिससे बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है। अदालत से गुहार लगाई गई है कि वह सरकार को सख्त कदम उठाने और तत्काल प्रदूषण नियंत्रण उपायों को लागू करने का निर्देश दे।
याचिकाकर्ताओं ने सुझाव दिया है कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए निर्माण कार्यों पर रोक, पुराने वाहनों के संचालन पर प्रतिबंध और सड़कों पर धूल कम करने के लिए पानी के छिड़काव जैसे उपाय तुरंत शुरू किए जाने चाहिए। पर्यावरणविदों का कहना है कि प्रशासन की अनदेखी के कारण हवा में जहरीले कणों की मात्रा लगातार बढ़ रही है। अब सबकी नजरें अदालत के आने वाले फैसले पर टिकी हैं, क्योंकि यह सीधे तौर पर लाखों नागरिकों के जीवन और उनके सांस लेने के अधिकार से जुड़ा मामला है।
