1000 की मामूली वृद्धि पर फूटा आशा कर्मियों का गुस्सा, न्यूनतम वेतन की मांग को लेकर निकाला विशाल जुलूस

राज्य सरकार द्वारा बजट में घोषित आशा कर्मियों के मानदेय में मात्र एक हजार रुपये की वृद्धि के विरोध में आज सिलीगुड़ी की सड़कों पर भारी विरोध प्रदर्शन देखा गया। ‘पश्चिम बंगाल आशा कर्मी यूनियन’ के आह्वान पर बाघाजतीन पार्क से एक विशाल विरोध रैली निकाली गई, जिसने शहर के विभिन्न मुख्य मार्गों का भ्रमण किया।प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वर्तमान कमरतोड़ महंगाई के दौर में मात्र एक हजार रुपये की वृद्धि उनके साथ एक भद्दा मजाक है। लंबे समय से सीमित पारिश्रमिक पर दिन-रात सेवा देने के बावजूद, उन्हें उचित सम्मान और न्यायसंगत मजदूरी से वंचित रखा जा रहा है।

प्रमुख माँगें:आंदोलनकारियों ने अपनी आवाज बुलंद करते हुए निम्नलिखित माँगें प्रशासन के सामने रखी हैं:न्यूनतम वेतन: राज्य सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम ₹15,000 प्रति माह का वेतन तत्काल लागू किया जाए।बकाया भुगतान: PLI, DOT सहित विभिन्न मदों में रुके हुए पिछले बकाये का शीघ्र भुगतान हो।एकमुश्त प्रोत्साहन: इंसेंटिव (Incentive) की राशि को किश्तों में देने के बजाय हर महीने एक साथ दिया जाए।छुट्टी और सुरक्षा: आशा कर्मियों के लिए वार्षिक अवकाश की व्यवस्था हो और कार्यस्थल पर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।इस विरोध मार्च में ‘पश्चिम बंगाल आशा कर्मी यूनियन’ के साथ-साथ ‘पश्चिम बंगाल नगर स्वास्थ्य कर्मी संविदा संघ’ (দার্জিলিং জেলা) के सदस्य भी बड़ी संख्या में शामिल हुए।

पश्चिम बंगाल आशा कर्मी यूनियन की अध्यक्ष नमिता चक्रवर्ती ने सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए कहा:”केवल एक हजार रुपये बढ़ाकर राज्य सरकार आशा कर्मियों के साथ अन्याय कर रही है। स्वास्थ्य सेवाओं में इतनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के बाद भी हमें हमारे अधिकारों से दूर रखा जा रहा है। जब तक हमारी माँगें पूरी नहीं होतीं, यह आंदोलन जारी रहेगा।”

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