हृदय रोग विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि हृदय संबंधी बीमारियाँ केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अब युवा पीढ़ी भी इसकी चपेट में आ रही है। अक्सर लोग यह मान लेते हैं कि कम उम्र में दिल का दौरा नहीं पड़ सकता, लेकिन आधुनिक जीवनशैली, अत्यधिक तनाव और खराब खान-पान के कारण यह धारणा गलत साबित हो रही है। डॉक्टरों का कहना है कि युवावस्था में शरीर की फिटनेस का मतलब यह कतई नहीं है कि हृदय पूरी तरह सुरक्षित है। उच्च रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल जैसे लक्षणों को नजरअंदाज करना जानलेवा हो सकता है, इसलिए २० और ३० की उम्र के युवाओं को भी नियमित जांच करानी चाहिए।
विशेषज्ञों के अनुसार, हृदय स्वास्थ्य को लेकर प्रचलित कई मिथकों को छोड़ना अनिवार्य है। केवल ‘सीने में दर्द’ ही दिल के दौरे का एकमात्र संकेत नहीं होता; सांस फूलना, अत्यधिक थकान और जबड़े या पीठ में दर्द भी इसके लक्षण हो सकते हैं। स्वस्थ दिखने वाले व्यक्ति भी आनुवंशिक कारणों या छिपी हुई बीमारियों के कारण जोखिम में हो सकते हैं। एक बेहतर भविष्य के लिए धूम्रपान का त्याग, संतुलित आहार और रोजाना व्यायाम को अपनाना जरूरी है। हृदय की देखभाल में की गई देरी अपरिवर्तनीय क्षति पहुंचा सकती है, इसलिए लक्षणों को उम्र के भरोसे न छोड़ें और समय पर चिकित्सकीय परामर्श लें।
