दुनिया भर में धूमधाम से मनाया गया प्रवासी भारतीय दिवस

प्रवासी भारतीय दिवस (पीबीडी) 9 जनवरी को देशभर के साथ-साथ विदेशों में भी धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विदेशों में रहने वाले भारतीयों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। पीएम मोदी ने कहा कि विदेशों में रह रहे भारतीय, भारत और दुनिया के बीच एक मजबूत सेतु का काम कर रहे हैं। इस मौके पर विदेशों में स्थित भारतीय मिशनों ने विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए। जिनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन ने शुक्रवार की शाम एक भव्य कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग शामिल हुए। वहीं शंघाई स्थित भारतीय महावाणिज्य दूतावास ने इस दिन को इंडियन एंटरप्रेन्योरशिप को बढ़ावा देने के तौर पर मनाया। यहां तैनात भारत के महावाणिज्य राजदूत प्रतीक माथुर ने हांग्जो के रीजनल टूरिज्म और उभरते एआई हब का दौरा किया। इस दौरान कॉन्सुल जनरल ने भारतीय कम्युनिटी के सदस्यों और एआई-टेक-नेक्स्ट जेनरेशन स्टार्टअप्स के लिए काम करने वाले भारतीय प्रवासी युवा थॉट लीडर्स से भी बातचीत की। उन्होंने अलग-अलग सेक्टर्स में बदलाव लाने और ‘मेड इन इंडिया, मेड फॉर द वर्ल्ड’ एआई सॉल्यूशंस में योगदान देने के लिए उनके इनोवेटिव काम की प्रशंसा की।

भूटान स्थित भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘प्रवासी भारतीय दिवस पुराने रिश्तों को मजबूत करने, दोस्ती बढ़ाने और देश के विकास में भारतीय डायस्पोरा के योगदान का सम्मान करने का एक लंबे समय से चला आ रहा अवसर है।’’ विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने विदेशों में रहने वाले करीब 3.5 करोड़ एनआरआई और भारतीय मूल के लोगों को इस खास दिन की शुभकामनाएं देते हुए एक्स पर लिखा, ‘‘हमें आप पर गर्व है! प्रवासी भारतीय दिवस पर, हम भारतीय डायस्पोरा को भारत की वैश्विक पहचान को मजबूत करने में उनकी अहम भूमिका के लिए सेलिब्रेट करते हैं। उनकी उपलब्धियां और योगदान देश और दुनिया भर में प्रगति, इनोवेशन और विकास को आगे बढ़ा रहे हैं।’’

यह 9 जनवरी 1915 को महात्मा गांधी के दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटने की याद दिलाता है और यह दिन दुनिया भर में फैले भारतीय समुदाय के भारत के विकास में योगदान को सम्मानित करने के लिए मनाया जाता है, जिसमें सांस्कृतिक कार्यक्रमों, पुरस्कार वितरण (प्रवासी भारतीय सम्मान) और भारत की प्रगति पर चर्चा के लिए मंच प्रदान किए जाते हैं। विदेश मंत्रालय की ओर से इसका प्रमुख कार्यक्रम हर दो साल में अलग-अलग राज्यों में आयोजित होता है, जहां प्रवासी भारतीय, नीति-निर्माता और हितधारक जुड़ते हैं।

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