होपकॉन’२५ ने स्वास्थ्य संवाद में नई उपलब्धि हासिल की: एक व्यापक मेडी-एडू-केयर कॉन्फ्रेंस

आईटीसी रॉयल बंगाल, कोलकाता में आयोजित होपकॉन, भारत की प्रमुख राष्ट्रीय बहु-विषयी मेडी-एडू-केयर कॉन्फ्रेंस का चौथा संस्करण, तीन दिवसीय भव्य सफलता के साथ संपन्न हुआ। कोलकाता नर्चर फाउंडेशन द्वारा यू एन आई एडू हेल्थ और वाल्मीकि हेल्थकेयर के सहयोग से आयोजित इस कॉन्फ्रेंस में देश-विदेश से १००० से अधिक प्रतिष्ठित मेडिकल विशेषज्ञों ने फैकल्टी और रिसोर्स पर्सन के रूप में भाग लिया। पूरे राज्य से ६५०० से अधिक डॉक्टर-प्रतिभागी आए, और १.५ लाख से अधिक वर्चुअल व्यूज के साथ यह आयोजन अपने आप में अभूतपूर्व बन गया।
इस बार की थीम “दी कंप्लीट कॉन्फ्रेंस फॉर कॉम्प्रिहेंसिव केयर” रही, जो स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में एक नई दिशा और आदर्श स्थापित करने वाली पहल रही।
“राष्ट्र निर्माण में स्वास्थ्य सेवा की रीढ़”
होपकॉन के संस्थापक और कोलकाता नर्चर फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. पायोधि धर, जो पूर्व भारत के एक प्रतिष्ठित चिकित्सा नेतृत्वकर्ता हैं, ने कहा, “हेल्थकेयर किसी भी राष्ट्रनिर्माण की रीढ़ होती है। होपकॉन वह मंच है जहां संपूर्ण मेडिकल समुदाय एकत्र होकर रोगी-केंद्रित समग्र स्वास्थ्य सेवा की बात करता है। हमारा लक्ष्य है स्वास्थ्य सेवा, स्वास्थ्य शिक्षा और स्वास्थ्य जागरूकता में सार्वभौमिकता लाना, शोध में वैश्विक मानक स्थापित करना, और शिक्षा-रोज़गार-सशक्तिकरण के त्रिकोण के माध्यम से भारत के हेल्थकेयर को वैश्विक नेतृत्व की दिशा में अग्रसर करना।”
व्यापक भागीदारी और विविध सत्र
इस वर्ष होपकॉन’२५ में देश के कोने-कोने, कश्मीर से केरल, मणिपुर से महाराष्ट्र तक से चिकित्सा विशेषज्ञ शामिल हुए, जिससे यह कॉन्फ्रेंस भारत की सबसे विविधतापूर्ण चिकित्सा सम्मेलनों में से एक बन गया। प्रतिभागियों ने प्रत्यक्ष और वर्चुअल रूप में ३८ से अधिक चिकित्सा विषयों जैसे नेफ्रोलॉजी, न्यूरोलॉजी, मनोरोग, हृदय रोग, ऑर्थोपेडिक्स, इम्यूनोलॉजी, डायबिटीज, न्यूट्रिशन, जेरियाट्रिक्स, मेडिकल फार्माकोलॉजी, क्रिटिकल केयर, मेडिकल रिसर्च आदि में संवाद और संवादात्मक सत्रों में भाग लिया।
कुछ प्रमुख सत्रों में शामिल रहे:
“रोमांस ऑफ मेडिसिन” – डॉ. अरूप कुमार कुंडू द्वारा
“मेडिकल एडूकेशन – लेक्चर: अ डाईंग आर्ट” – डॉ. पार्थप्रतिम प्रधान एवं डॉ. संहिता मुखर्जी द्वारा
“बायोलॉजिकल साइकियाट्री कॉन्क्लेव” – डॉ. गौतम साहा, डॉ. राजेश नागपाल, डॉ. अविनाश डी सूज़ा द्वारा
“मेडिकल रिसर्च वर्कशॉप” – डॉ. अविजीत हाज़रा द्वारा
डॉ. अरुणांशु तालुकदार एवं उनकी टीम द्वारा संचालित जेरिएट्रिक्स और सामाजिक जेरियाट्रिक्स सत्रों ने सम्मेलन में एक सांस्कृतिक गहराई जोड़ दी, जब श्रीमती पीलू विद्यार्थी और शकुंतला बरुआ जैसी हस्तियों ने वृद्धजनों की भलाई पर अपने विचार साझा किए।
समसामयिक और सामाजिक विषयों पर गंभीर चर्चा
इस आयोजन की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि पारंपरिक एकेडमिक विषयों के साथ-साथ इसमें डिजिटल हेल्थ, साइबर अपराध, मेडिकल लीगल मुद्दों, पर्यावरण स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य, ऑटिज़्म, आत्महत्या रोकथाम जैसे वर्तमान और सामाजिक रूप से प्रासंगिक विषयों को भी गंभीरता से उठाया गया।
होपकॉन के चेयरमैन डॉ. अपूर्ब कुमार मुखर्जी ने कहा, “होपकॉन हमेशा से एकीकृत और रोगी-प्रथम सोच वाला आयोजन रहा है। इस बार जो ऊर्जा, ज्ञान और सुधार की मंशा हमने देखी वह अद्वितीय रही।”
इस वर्ष विशेष चर्चा में हेल्थकेयर एंटरप्रेन्योरशिप, मेडिकल डिप्लोमेसी, मेडिकल जर्नलिज़्म, मेडिकल एडमिनिस्ट्रेशन जैसे विषयों को शामिल किया गया। नकली दवाएं, इंफोडेमिक, मेडिकालाइज़ेशन जैसे नाजुक विषयों पर भी बेझिझक चर्चा हुई।

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