स्मार्ट टीवी में मौजूद ‘इन-बिल्ट स्टेबलाइजर’ को लेकर गलतफहमी, विशेषज्ञ बाहरी सुरक्षा की सलाह देते हैं

स्मार्ट टीवी खरीदते समय “इन-बिल्ट स्टेबलाइज़र” आजकल एक बड़ा सेलिंग पॉइंट (बिक्री का मुख्य आधार) बन गया है। कई खरीदार इसे वोल्टेज के उतार-चढ़ाव से सुरक्षा की गारंटी मान लेते हैं। हालांकि, उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि इस शब्द को अक्सर गलत तरीके से समझा जाता है। दरअसल, आधुनिक टेलीविज़न में एसएमपीएस (स्विच मोड पावर सप्लाई) लगा होता है। इसका मुख्य काम एसी बिजली को डीसी बिजली में बदलना है, जिसकी ज़रूरत टीवी के अंदरूनी सर्किट को होती है। यह बाहरी वोल्टेज के उतार-चढ़ाव को उस तरह नियंत्रित करने के लिए नहीं बनाया गया है, जैसे एक समर्पित स्टेबलाइज़र काम करता है। 

देश के कई हिस्सों में आज भी वोल्टेज का स्थिर न होना एक बड़ी समस्या है। अर्ध-शहरी और ग्रामीण इलाकों में अक्सर वोल्टेज ऊपर-नीचे होता रहता है, जबकि शहरों में एक साथ कई भारी बिजली उपकरण (एसी, फ्रिज आदि) चलने से लोड असंतुलन की स्थिति बन जाती है। ऐसी स्थिति में टीवी चलता तो रहता है, जिससे लोगों को भ्रम होता है कि उनका टीवी सुरक्षित है। लेकिन असल में, अंदर ही अंदर लगातार वोल्टेज के उतार-चढ़ाव के कारण एसएमपीएस का तापमान बढ़ जाता है। लंबे समय तक ऐसा होने से टीवी के पुर्जों पर बुरा असर पड़ता है और टीवी की उम्र कम हो सकती है।

यदि एसएमपीएस खराब हो जाए, तो टीवी के संवेदनशील इलेक्ट्रॉनिक हिस्से सीधे हाई एसी वोल्टेज की चपेट में आ सकते हैं, जिससे बहुत महंगी मरम्मत की नौबत आ सकती है। बिजली कटने के बाद जब सप्लाई दोबारा आती है, तो कुछ माइक्रोसेकंड के लिए बहुत तेज़ वोल्टेज स्पाइक्स पैदा हो सकते हैं। इस बात की कोई यूनिवर्सल गारंटी नहीं है कि सभी टीवी मॉडल सर्किट लेवल पर इन स्पाइक्स से पूरी सुरक्षा दे सकते हैं। प्रमुख कंज्यूमर एप्लायंस ब्रांड वी-गार्ड द्वारा साझा की गई टेस्ट रिपोर्ट्स बताती हैं कि लगातार वोल्टेज का दबाव पड़ने से एसएमपीएस का तापमान काफी बढ़ जाता है, जिसका सीधा असर टीवी की लंबी उम्र पर पड़ता है।

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