स्विगी-किर्नी रिपोर्ट के अनुसार, भारत का खाद्य सेवा उद्योग 2030 तक 125 अरब डॉलर की छलांग लगाने के लिए तैयार है

भारत के अग्रणी ऑन-डिमांड सुविधा प्लेटफ़ॉर्म स्विगी, (स्विगी लिमिटेड, NSE:
SWIGGY / BSE: 544285) ने अपनी सालाना रिपोर्ट “हाउ इंडिया ईट्स” का 2025 संस्करण जारी किया। यह रिपोर्ट स्विगी और कियर्नी की साझेदारी में बनाई गई है। यह फ्लैगशिप रिपोर्ट का दूसरा संस्करण है और दिखाता है कि भारतीय ग्राहकों की खाने-पीने की आदतें किस तरह बदल रही हैं।  रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि भारत का फ़ूड सर्विसेज़ मार्केट 2030 तक 125 बिलियन अमेरिकी डॉलर को पार कर जाएगा। इसमें असंगठित क्षेत्र के मुकाबले संगठित क्षेत्र 2 गुणा तेज़ी से बढ़ेगा।

रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए रोहित कपूर, सीईओ, स्विगी फ़ूड मार्केटप्लेस ने कहा, “सिर्फ एक दशक में ही यह उद्योग असमान रूप से बदल गया है। स्पीड को लेकर लोगों की उम्मीदें क्विक कॉमर्स तय कर रहा है। उदाहरण के तौर पर, हमारी 10 मिनट फूड डिलीवरी सेवा ‘बोल्ट’ प्लेटफॉर्म पर 10% से अधिक ऑर्डर दे रही है। एक तरफ उपभोक्ता भारतीय और इटालियन जैसे अपने पसंदीदा व्यंजनों में किफ़ायत चाहते हैं, और दूसरी तरफ माचा और बोबा टी को पहले से कहीं ज्यादा अपना रहे हैं। हमारे रेस्तरां पार्टनर भी कदम से कदम मिलाकर चल रहे हैं। क्यूएसआर और क्लाउड किचन 17% से अधिक की वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ने की राह पर हैं, जो संगठित फूड सर्विस इंडस्ट्री की ग्रोथ से करीब 1.5 गुना है। मैं वास्तव में उत्सुक हूं कि आने वाला दशक इस तेजी से बदलते क्षेत्र में सभी हितधारकों के लिए क्या नई संभावनाएं लेकर आएगा।”

रजत तुली, पार्टनर, एफ एंड बी लीड और क्यूएसआर एशिया लीड, किअर्नी ने कहा, “हम भारत की फूड इकॉनमी का दायरा मूल रूप से बदलते हुए देख रहे हैं। अब विकास कुछ चुनिंदा महानगरों तक सीमित नहीं है। टॉप 8 शहरों के बाहर डाइनिंग–आउट की ग्रोथ, टॉप 8 शहरों की तुलना में 2 गुना तेज है, जिसमें कॉरपोरेट, इंडस्ट्रियल, एजुकेशन और टूरिस्ट हब सबसे आगे हैं। जेन–जी में जबरदस्त संभावनाएं हैं। यह समूह डाइनिंग–आउट में बाकी सभी समूहों की तुलना में 3 गुना तेजी से बढ़ रहा है और कॉफ़ी रेव जैसी नई चीजों और इंस्टाग्राम–फ्रेंडली स्थानों व मेन्यू की मांग कर रहा है। फूड सर्विसेज में अगली लीडरशिप उसी के पास होगी जो इन नए बाज़ारों और उपभोक्ताओं को बेहतर समझता हो। इसके अलावा, फूड डिलीवरी में पैकेजिंग इनोवेशन डाइनिंग–आउट के फॉर्मेट की जगह लेगा।” इन बदलते रुझानों का सामना करने के लिए फूड सर्विसेज सेक्टर को स्पीड, किफ़ायत और अनुभव पर खास ध्यान देते हुए कई प्राथमिकताओं के बीच संतुलन बनाकर काम करना होगा।

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