सोमवार, १६ मार्च २०२६ को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोलकाता के कॉलेज स्क्वायर से डोरिना क्रॉसिंग तक रसोई गैस की किल्लत और बढ़ती कीमतों के खिलाफ एक विशाल विरोध रैली का नेतृत्व किया। इस रैली के दौरान सड़क किनारे खड़े आम नागरिकों और राहगीरों के बीच इस संकट के कारणों को लेकर तीखी बहस देखने को मिली। जहाँ कुछ लोग केंद्र सरकार की नीतियों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी तनाव इस किल्लत के लिए जिम्मेदार ठहरा रहे थे, वहीं कुछ अन्य का मानना था कि यह संकट केवल घबराहट में की गई ‘पैनिक बुकिंग’ के कारण पैदा हुआ है।
रैली में गैस सिलेंडरों के कट-आउट और खाली बर्तनों जैसे प्रतीकों का उपयोग किया गया था। चर्चा के दौरान एक चाय विक्रेता ने कहा कि बढ़ती कीमतों ने गरीबों का जीना मुहाल कर दिया है, जबकि पास ही खड़े एक अन्य व्यक्ति का तर्क था कि वैश्विक संकट के लिए प्रधानमंत्री को दोष देना गलत है। रिपोर्ट के अनुसार, कोलकाता में एक व्यावसायिक सिलेंडर की कीमत कालाबाजारी में ४,००० रुपये तक पहुँच गई है। ममता बनर्जी ने इस अवसर पर भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जनता को सब्सिडी देने के बजाय सरकार अपना पैसा रैलियों और प्रचार में खर्च कर रही है। यह बहस दर्शाती है कि आगामी विधानसभा चुनावों में एलपीजी का मुद्दा एक निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
