पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के कालियाचक थाना अंतर्गत जमालपुर के रहने वाले प्रवासी मजदूर अमीर शेख को राजस्थान पुलिस ने बांग्लादेशी बताकर हिरासत में लिया और जरूरी दस्तावेज दिखाने के बावजूद उसे दो महीने तक डिटेंशन कैंप में रखकर शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना दी। इसके बाद उसे बांग्लादेश भेज दिया गया।अमीर शेख मजदूरी के काम से राजस्थान गया था, जहां उसे सिर्फ बंगाली भाषा बोलने की वजह से बांग्लादेशी समझ लिया गया। उसके परिवार ने भारतीय नागरिकता के सभी दस्तावेज राजस्थान पुलिस को भेजे, लेकिन उन्हें नजरअंदाज कर दिया गया।
डिटेंशन कैंप में दो महीने बिताने के बाद अमीर को घोजाडांगा बॉर्डर से बीएसएफ के माध्यम से बांग्लादेश भेज दिया गया। बांग्लादेश में 20 दिन तक रहने के दौरान एक स्थानीय युवक के मोबाइल से वीडियो कॉल कर अमीर ने सोशल मीडिया पर अपनी स्थिति साझा की, जिसके बाद मामला तूल पकड़ लिया। लगातार दबाव और सोशल मीडिया पर मुद्दा गरमाने के बाद अंततः बुधवार शाम अमीर शेख को बांग्लादेश से घोजाडांगा सीमा के रास्ते वापस भारत लाया गया, जहाँ बीएसएफ ने उसे बसीरहाट थाने को सौंप दिया। बसीरहाट पुलिस ने सभी कागजातों की जांच करने के बाद अमीर को उसके परिवार को सौंप दिया। अमीर को लेने के लिए मालदा से उसके पिता, काका, भाई और एक वकील बसीरहाट थाने पहुंचे थे।
परिवार का आरोप है कि “केवल बंगाली भाषा बोलने के कारण मेरे बेटे को बांग्लादेशी कहा गया और अमानवीय यातना दी गई। वो जन्म से भारतीय है, यह साबित करने के बावजूद भी पुलिस ने उसे नहीं छोड़ा।” इस घटना ने देश के भीतर पहचान, प्रवासी श्रमिकों की स्थिति और भाषा के आधार पर भेदभाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
