उच्चतम न्यायालय ने असम सरकार को राज्य के वन क्षेत्रों से अवैध अतिक्रमण हटाने के लिए चल रहे अभियान को जारी रखने की अनुमति दे दी है। इस महत्वपूर्ण फैसले के तहत लगभग ५ लाख बीघा वन भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने पर ध्यान केंद्रित किया गया है, जो वर्तमान में अवैध कब्जों के अधीन है। न्यायालय ने पर्यावरण संरक्षण और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर देते हुए स्पष्ट किया कि वन भूमि का उपयोग केवल वनीकरण और संबंधित गतिविधियों के लिए ही किया जाना चाहिए।
राज्य सरकार ने अदालत को सूचित किया कि ये बेदखली अभियान पारिस्थितिक तंत्र की सुरक्षा और वन्यजीवों के आवासों को संरक्षित करने के लिए आवश्यक हैं। दूसरी ओर, प्रभावित समुदायों की ओर से दायर याचिकाओं में पुनर्वास और मानवाधिकारों का मुद्दा उठाया गया था, जिस पर अदालत ने सरकार को उचित प्रक्रिया का पालन करने का निर्देश दिया है। इस न्यायिक अनुमति के बाद, असम के विभिन्न जिलों में बड़े पैमाने पर बेदखली की कार्रवाई तेज होने की उम्मीद है, जिससे वन क्षेत्र की भूमि को फिर से बहाल किया जा सकेगा।
