टाटा मोटर्स ने सोमवार को बढ़ती कमोडिटी कीमतों और इनपुट लागत में वृद्धि का हवाला देते हुए, 1 अप्रैल, 2026 से प्रभावी रूप से अपने कमर्शियल वाहन रेंज में 1.5 प्रतिशत तक की मूल्य वृद्धि की घोषणा की। कंपनी ने कहा कि यह मूल्य वृद्धि कच्चे माल की बढ़ती लागत के प्रभाव को आंशिक रूप से कम करने के उद्देश्य से की गई है। मूल्य वृद्धि की मात्रा वाहन के मॉडल और वेरिएंट के आधार पर अलग-अलग होगी।
180 बिलियन डॉलर के टाटा समूह का हिस्सा, टाटा मोटर्स भारत की सबसे बड़ी कमर्शियल वाहन निर्माता कंपनी है। साथ ही, यह यूटिलिटी वाहनों, पिकअप, ट्रकों और बसों के विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त निर्माता के रूप में भी जानी जाती है। व्यवसायिक गतिशीलता (commercial mobility) के क्षेत्र में आठ दशकों से अधिक के अनुभव के साथ, कंपनी ने नवाचार , विश्वसनीयता और बेहतरीन प्रदर्शन के लिए अपनी एक अलग पहचान बनाई है। इसके उत्पाद पोर्टफोलियो में उन्नत पावरट्रेन, कनेक्टेड टेक्नोलॉजी और इंटेलिजेंट फ्लीट सॉल्यूशन शामिल हैं जो लास्ट-माइल डिलीवरी से लेकर सार्वजनिक परिवहन तक विभिन्न प्रकार के अनुप्रयोगों को पूरा करते हैं। यह कंपनी भारत और दक्षिण कोरिया में कार्यरत है और अफ्रीका, मध्य पूर्व, लैटिन अमेरिका, दक्षिण पूर्व एशिया और SAARC देशों में इसकी वैश्विक उपस्थिति है।
नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT), मुंबई पीठ द्वारा अनुमोदित एक ‘कंपोजिट स्कीम ऑफ अरेंजमेंट’ के अनुसार, 29 अक्टूबर, 2025 को कंपनी का नाम ‘टीएमएल कमर्शियल व्हीकल्स लिमिटेड’ (TML Commercial Vehicles Limited) से बदलकर टाटा मोटर्स लिमिटेड (Tata Motors Limited) कर दिया गया था। इसके इक्विटी शेयर वर्तमान में BSE और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया दोनों पर सूचीबद्ध हैं। कोलकाता में, प्रमुख निर्माताओं द्वारा कीमतों में किया गया बदलाव अक्सर पूरे पूर्वी भारत में फ्लीट खरीद और लॉजिस्टिक्स निवेश को प्रभावित करता है। उद्योग जगत के हितधारकों का कहना है कि क्षेत्र में ई-कॉमर्स डिलीवरी, बंदरगाह से जुड़ी लॉजिस्टिक्स और बुनियादी ढांचागत गतिविधियों में वृद्धि के कारण कोलकाता और उसके आसपास के क्षेत्रों में ट्रकों और छोटे मालवाहक वाहनों की मांग मजबूत बनी हुई है।
